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पासीघाट में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और दो विधायकों के आवासों में तोड़फोड़, बंद के दौरान झड़पों में कई लोग घायल

अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित सियांग बांध परियोजना के विरोध में आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) के कार्यालय और पुलिस थाने में आगजनी की। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग तथा मरियांग-गेकू के विधायक ओनी पान्यांग और पासीघाट पश्चिम के विधायक निनोंग एरिंग के आवासों में भी तोड़फोड़ की गई। हिंसा में कई लोग घायल हुए और पुलिस के वाहनों समेत कई गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया।

यह घटनाक्रम सियांग, अपर सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में प्रस्तावित बांध परियोजना के विरोध में बुलाए गए 12 घंटे के बंद के बाद सामने आया। शुक्रवार को दिनभर कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए। शाम को बंद की अवधि समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखा। पासीघाट में सुरक्षा बलों के साथ टकराव के बाद स्थिति बिगड़ गई और रात में आगजनी तथा तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं।

प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने राजमार्ग पर आवागमन रोक दिया था। उन्हें हटाने के लिए बातचीत की गई, लेकिन स्थिति नियंत्रित नहीं होने पर मजिस्ट्रेट के आदेश से आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इसके बाद पथराव की घटनाएं हुईं, जिनमें पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के घायल होने की खबर है।

हिंसा के दौरान एनएचपीसी कार्यालय, पुलिस थाने और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया गया। तीन राजनीतिक नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ की घटनाओं ने मामले को और गंभीर बना दिया। इसके बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए।

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की निंदा करते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन किसी भी विवाद का समाधान हिंसा के बजाय संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए। सरकार ने परियोजना को लेकर स्थानीय समुदायों की चिंताओं पर बातचीत करने की तत्परता भी जताई।

क्यों हो रहा विरोध? प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना को लेकर स्थानीय संगठनों और समुदायों के एक वर्ग में चिंता है। प्रदर्शनकारी परियोजना से संबंधित सर्वेक्षण गतिविधियों को रोकने, गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई, निलंबित गांव प्रमुखों की बहाली और क्षेत्र से केंद्रीय सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की मांग कर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि परियोजना से पारंपरिक भूमि, आजीविका, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

वहीं, राज्य सरकार परियोजना को ऊर्जा उत्पादन, जल भंडारण और बाढ़ प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानती है। ऐसे में स्थानीय समुदायों की आशंकाओं और परियोजना के संभावित लाभों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। हिंसा के बाद अब प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बहाल करने के साथ-साथ विरोध कर रहे संगठनों के साथ संवाद का रास्ता तलाशने की चुनौती है।

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