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2026 में लगातार दुर्घटनाओं से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल, ट्रक-ट्रेलर की आमने-सामने भिड़ंत में चालक की गई जान

कोरबा जिले की कुसमुंडा कोयला खदान में हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को एक बार फिर खदान परिसर में दो भारी वाहनों की आमने-सामने हुई भीषण भिड़ंत में एक चालक की मौत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक वाहन का केबिन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक उसमें फंस गया। मौके पर पहुंची बचाव टीम ने काफी मशक्कत के बाद चालक को बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर कुसमुंडा खदान में भारी वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा हादसे की पुष्टि स्थानीय समाचार रिपोर्टों में भी हुई है।

ढलान पर तेज रफ्तार ट्रक हुआ अनियंत्रित

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शनिवार शाम करीब चार बजे रेल साइडिंग से कोयला खाली कर हर्ष ट्रांसपोर्ट का ट्रक तीस नंबर कोल स्टॉक की ओर लौट रहा था। बताया गया कि ट्रक की गति काफी तेज थी। ढलान वाले हिस्से में चालक वाहन की गति नियंत्रित नहीं कर सका और ट्रक अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे कोयला लोड वाहन के ट्रेलर से जा भिड़ा। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक का केबिन बुरी तरह पिचक गया और चालक उसके भीतर फंस गया।

केबिन काटकर निकाला गया चालक

हादसे की सूचना मिलते ही खान सुरक्षा विभाग की टीम और संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे। दुर्घटनाग्रस्त दोनों वाहनों को अलग करने के बाद क्षतिग्रस्त केबिन में फंसे चालक को बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया। जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृत चालक की पहचान रेलिया निवासी विश्व प्रसाद बिट्टू, पिता राखी प्रसाद, उम्र 29 वर्ष बताया गया है।

मुआवजे और रोजगार को लेकर देर रात तक चर्चा

हादसे के बाद मृतक के परिजन और परिचित देर रात तक अस्पताल में मौजूद रहे। परिजनों ने मुआवजा और परिवार के भविष्य को लेकर मांग रखी। चर्चा के बाद निजी एवं विभागीय कंपनी के अधिकारियों की ओर से तत्काल तीन लाख रुपये की सहायता राशि देने पर सहमति बनने की बात सामने आई है।

इसके अलावा कंपनी की मार्गदर्शिका के तहत बीमा राशि दिलाने में सहयोग तथा मृतक के परिजन को निजी कंपनी में रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर भी सहमति की जानकारी दी गई है। रात होने के कारण शव को मर्चुरी में सुरक्षित रखवाया गया। आज कुसमुंडा पुलिस ने मर्ग पंचनामा की कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

2026 में लगातार सामने आए घातक हादसे

कुसमुंडा में यह वर्ष दुर्घटनाओं के लिहाज से बेहद चिंताजनक रहा है। जनवरी में हाइड्रोलिक मशीन का सिलेंडर फटने से एक कर्मचारी की मौत और दो कर्मचारियों के घायल होने की घटना सामने आई थी। इसके बाद डंपर पलटने, भारी वाहनों की चपेट में आने और अन्य दुर्घटनाओं में भी मौतें हुईं।

जून में 60 टन के डंपर के करीब 150 फीट गहरी खाई में गिरने से कर्मचारी की मौत की रिपोर्ट सामने आई थी। घटना के बाद कर्मचारियों ने काम बंद कर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।

जुलाई में रोड सेल क्षेत्र में भारी वाहन की चपेट में आने से चालक की मौत हुई थी। पुलिस ने घटना के कारणों और संभावित लापरवाही की जांच की बात कही थी।

अगस्त में कुसमुंडा खदान के कांटा घर के पास तेज रफ्तार ट्रेलर की चपेट में आने से सुपरवाइजर बहरता दास की मौत की घटना भी सामने आई। घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने जीएम कार्यालय में प्रदर्शन किया था।

इसके अलावा मई में कोयले से भरे ट्रेलर में आग लगने की घटना हुई थी, जिसमें चालक ने वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई थी।

इंटक ने कहा—सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा हो

लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर श्रमिक संगठन इंटक ने भी चिंता जताई है। कुसमुंडा क्षेत्र के इंटक नेता राजूलाल सोनी ने कहा कि खदान में लगातार हो रही दुर्घटनाएं और इनमें मजदूरों की मौत गंभीर चिंता का विषय है। प्रबंधन को इसे गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए और खदान परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने चाहिए।

उन्होंने मृतक के परिजनों को संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलने वाले मुआवजे की तर्ज पर उचित मुआवजा देने की मांग की।

सवालों के घेरे में भारी वाहनों की आवाजाही

कुसमुंडा खदान में कोयला परिवहन के लिए बड़ी संख्या में भारी वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में ढलान, मोड़, स्टॉक और रेल साइडिंग से जुड़े मार्गों पर वाहनों की गति, यातायात नियंत्रण, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।

लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं के बीच अब सवाल यह है कि क्या खदान परिसर में भारी वाहनों की गति और आवाजाही की निगरानी पर्याप्त है? क्या दुर्घटना संभावित स्थानों की नियमित सुरक्षा समीक्षा होती है? और पहले हुए हादसों के बाद दिए गए सुरक्षा निर्देश वास्तव में जमीन पर लागू किए जा रहे हैं?

कुसमुंडा खदान में एक के बाद एक हो रही दुर्घटनाओं के मद्देनजर इन सवालों का जवाब अब प्रबंधन और संबंधित सुरक्षा अधिकारियों से अपेक्षित है।

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