वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता की वेबसाइट और उससे जुड़े सभी उप-डोमेन को वेब होस्टिंग कंपनी होस्टिंगर द्वारा अचानक बंद किए जाने का मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल माध्यमों पर पत्रकारिता के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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ठाकुरता के सार्वजनिक बयान के मुताबिक, 24 अक्टूबर 2026 को पटियाला हाउस अदालत ने एक विशेष लेख को हटाने और इंटरनेट खोज परिणामों से बाहर करने का अंतरिम आदेश दिया था। उनका आरोप है कि इसके बाद 28 अक्टूबर को होस्टिंगर ने कथित तौर पर ‘धोखाधड़ी और जालसाजी’ की शिकायत का हवाला देकर उनकी पूरी होस्टिंग सेवा निलंबित कर दी।

इस कार्रवाई में उनकी 12 साल पुरानी वेबसाइट के साथ पत्रकारिता, पुस्तकों, वृत्तचित्रों और खोजी रिपोर्टों का पूरा डिजिटल संग्रह भी इंटरनेट से गायब हो गया। ठाकुरता का कहना है कि अदालत का आदेश एक खास लेख से संबंधित था, जबकि होस्टिंग कंपनी ने बिना पूर्व सूचना या जवाब देने का अवसर दिए पूरा खाता बंद कर दिया।

ठाकुरता ने यह भी दावा किया कि 28 अक्टूबर को किए गए वायरसटोटल सुरक्षा परीक्षण में 92 सुरक्षा प्रदाताओं में से किसी ने भी उनकी वेबसाइट को संदिग्ध या धोखाधड़ी वाली वेबसाइट के रूप में चिह्नित नहीं किया। गूगल की सुरक्षित ब्राउजिंग जांच में भी असुरक्षित सामग्री नहीं मिलने की जानकारी दी गई। उन्होंने होस्टिंगर से शिकायतकर्ता की पहचान, कार्रवाई के आधार और बिना पूर्व सूचना पूरा खाता बंद करने का कारण बताने की मांग की है।

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