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कांग्रेस नेता बोले— एफएसएसएआई की तारीफ नहीं, उससे सवाल पूछिए; आखिर अब तक कहां था खाद्य सुरक्षा नियामक?

नई दिल्ली। प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली कंपनी सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड के खिलाफ भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने अभियोजन की कार्रवाई शुरू की है। प्राधिकरण के अनुसार, कंपनी की विनिर्माण इकाई में बिस्किट बनाने के लिए पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाला चोकर रेशे (फाइबर) के स्रोत के तौर पर उपयोग किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान ऐसे चोकर की बोरियां भी मिलीं, जिन पर पशु आहार के लिए होने का उल्लेख था। इसके अलावा कारखाने में साफ-सफाई, कीट नियंत्रण और कच्चे माल के भंडारण से जुड़ी खामियां भी सामने आईं। इन गंभीर अनियमितताओं के बाद कंपनी का लाइसेंस पहले ही निलंबित किया जा चुका था। 

इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एफएसएसएआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियामक की कार्रवाई की सराहना करने के बजाय उससे जवाब मांगा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “एफएसएसएआई की तारीफ मत कीजिए, उससे सवाल पूछिए।”

खेड़ा ने सवाल उठाया कि बिस्किट निर्माण में कथित तौर पर पशु आहार के चोकर का इस्तेमाल कितने समय से हो रहा था और नियामक को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली। उन्होंने पूछा कि यदि खाद्य सुरक्षा नियमों का इतने गंभीर स्तर पर उल्लंघन हो रहा था, तो निरीक्षण व्यवस्था क्या कर रही थी? क्या जांच में लापरवाही हुई, रिपोर्टों की अनदेखी की गई या जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी थीं? उन्होंने यह भी सवाल किया कि आखिर इतने समय तक कंपनी को कौन संरक्षण दे रहा था।

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक सवाल

पवन खेड़ा ने इस मामले को केवल प्रियागोल्ड तक सीमित न मानते हुए देश में खाद्य सुरक्षा नियमन की व्यापक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ ऐसे खाद्य योजक और कीटनाशक, जिनका संबंध कैंसर या तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियों से जोड़ा गया है और जिन पर कई देशों में प्रतिबंध हैं, भारत में अब भी इस्तेमाल की अनुमति के दायरे में हैं।

खेड़ा ने एफएसएसएआई की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संस्था देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है, लेकिन उसी की मंजूरी से ऐसे पदार्थ खाद्य आपूर्ति व्यवस्था तक पहुंचते हैं। उनके अनुसार, मामला केवल निगरानी में कमी का नहीं, बल्कि नियामकीय फैसलों और जवाबदेही का भी है।

उन्होंने कहा कि जनता को प्रियागोल्ड जैसी कंपनियों से सुरक्षित रखने के लिए एफएसएसएआई क्या कर रहा है, यह पूछना जरूरी है। लेकिन इसके साथ एक और सवाल है— “एफएसएसएआई से जनता की रक्षा कौन करेगा?”

खेड़ा के इन आरोपों और सवालों पर नियामक की ओर से जवाब की पुष्टि किए बिना उन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। वहीं, प्रियागोल्ड निर्माता के खिलाफ अभियोजन की शुरुआत खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के मामले में नियामक की कार्रवाई है; इससे संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अंतिम निष्कर्ष को अभी अलग रखा जाना चाहिए।

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