ओडिशा में आदिवासी समुदायों के बीच स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाले चिकित्सक डॉ. रैंडल सिक्वेरा और दलित कार्यकर्ता लक्ष्मण नायक की गिरफ्तारी को लेकर विवाद गहरा गया है। दोनों को 16 अक्टूबर की रात कालाहांडी जिले के भवानीपटना स्थित आवास से पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर अप्रैल में रायगढ़ जिले के कांटामाल गांव में खनन विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद दोनों को रायगढ़ उपजेल भेज दिया गया।

आदिवासी समुदायों के बीच वर्षों से काम कर रहे हैं चिकित्सक

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डॉ. सिक्वेरा ने बेंगलुरु के सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की और आंतरिक चिकित्सा में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करने के बाद ओडिशा के कालाहांडी और रायगढ़ जिलों में आदिवासी समुदायों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं के लिए काम किया। वे दूरस्थ गांवों में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं।

लिवरडॉक के नाम से चर्चित चिकित्सक साइरिएक एबी फिल ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में डॉ. सिक्वेरा के 2018 में कुटरुमाली गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर का उल्लेख किया है। उन्होंने कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं की समस्याओं और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासी समुदायों के स्वास्थ्य को उनके जंगल, जमीन, पानी और आजीविका से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

खनन विरोधी आंदोलन से जुड़ा है मामला

सामाजिक संगठनों के अनुसार, दोनों की गिरफ्तारी का संबंध सिजिमाली क्षेत्र में बॉक्साइट खनन के विरोध से है। सिजिमाली में वेदांता समूह की प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदायों और प्रशासन के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। अप्रैल 2026 में खदान तक पहुंच मार्ग के निर्माण का विरोध कर रहे ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें आई थीं।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि खनन परियोजनाओं से जंगल, जलस्रोत, आजीविका और आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो सकती है। कुटरुमाली क्षेत्र में अडानी समूह से जुड़ी परियोजना को लेकर भी विरोध की खबरें सामने आई हैं।

पुलिस का आरोप, सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल

पुलिस के अनुसार, डॉ. सिक्वेरा और लक्ष्मण नायक पर कांटामाल गांव में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों पर हमले के लिए लोगों को उकसाने का आरोप है। उनके खिलाफ हत्या के प्रयास, दंगा और शस्त्र अधिनियम सहित विभिन्न प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

दूसरी ओर, नागरिक अधिकार संगठनों ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया और गंभीर आरोपों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दोनों की गिरफ्तारी आदिवासी और दलित समुदायों के खनन विरोधी आंदोलन के संदर्भ में देखी जानी चाहिए। हालांकि, गिरफ्तारी के पीछे कंपनियों के हितों को कारण बताने वाला दावा सामाजिक संगठनों का आरोप है; इसे किसी स्थापित न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

चिकित्सक की रिहाई की मांग

लिवरडॉक ने चिकित्सा समुदाय और आम नागरिकों से डॉ. सिक्वेरा के समर्थन में आवाज उठाने, मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने और उनकी रिहाई की मांग करने की अपील की है। उन्होंने लोगों से एकजुटता संबंधी ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर करने और जरूरतमंदों की सहायता के लिए मेडिको फ्रेंड सर्कल से संपर्क करने का आग्रह भी किया है।

डॉ. सिक्वेरा की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि खनिज संसाधनों के दोहन और विकास परियोजनाओं के बीच आदिवासी समुदायों के अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और असहमति जताने के अधिकार की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।

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