कांग्रेस ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर 1,320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली की खरीद के लिए जारी निविदा प्रक्रिया में अदाणी पावर को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है। राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने दावा किया कि निविदा की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए गए, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया अदाणी पावर के अनुकूल हो गई।
कांग्रेस के अनुसार, इस 25 वर्षीय बिजली खरीद समझौते से उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं पर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ सकता है। हालांकि यह राशि कांग्रेस द्वारा किए गए अनुमान पर आधारित है और वास्तविक भुगतान बिजली उत्पादन, अनुबंध की शर्तों तथा अन्य कारकों पर निर्भर करेगा।
पवन खेड़ा ने कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार ने पहले सार्वजनिक क्षेत्र की यूजेवीएन और टीएचडीसी की संयुक्त परियोजना को समाप्त किया और इसके बाद 1,320 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए नया टेंडर जारी किया। उनके मुताबिक, 16 जनवरी 2025 को सार्वजनिक क्षेत्र की प्रस्तावित परियोजना को समयसीमा संबंधी चिंताओं के आधार पर आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया गया था। इसके बाद 3 फरवरी 2025 को उत्तराखंड विद्युत निगम लिमिटेड ने 1,320 मेगावाट बिजली खरीद के लिए नई निविदा जारी की।
परियोजना कहीं भी लगाने की अनुमति पर सवाल
खेड़ा का आरोप है कि केंद्रीय बिजली मंत्रालय के मानक निविदा दस्तावेज में 86 में से 84 बदलाव किए गए। इनमें प्रमुख बदलाव यह था कि बिजली संयंत्र को उत्तराखंड में लगाने की अनिवार्यता हटाकर उसे देश में कहीं भी स्थापित करने की अनुमति दी गई।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि बिजली एक हजार किलोमीटर से अधिक दूरी से उत्तराखंड लाई जाती है तो उसके पारेषण की लागत का भार बोलीदाता के बजाय सरकारी व्यवस्था पर क्यों डाला गया। खेड़ा ने निविदा में फिक्स्ड चार्ज को 70 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किए जाने पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस का आरोप है कि नई व्यवस्था में 1,320 मेगावाट की पूरी बिजली एक ही बोलीदाता से लेने का प्रावधान भी किया गया। पार्टी ने सरकार से पूछा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजना को समाप्त करने के बाद ऐसी निविदा क्यों तैयार की गई, जिसकी शर्तों में इतने बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए।
₹5.746 प्रति यूनिट की दर से 25 साल की खरीद
उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने 25 अगस्त 2026 को अदाणी पावर से 1,320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली की 25 वर्ष की खरीद को मंजूरी दी। रिपोर्टों के अनुसार निर्धारित दर ₹5.746 प्रति यूनिट है और बिजली की आपूर्ति छत्तीसगढ़ स्थित परियोजना से की जानी है।
कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए निविदा की सभी शर्तों, उनमें किए गए बदलावों और प्रतिस्पर्धी बोली से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की है। विपक्ष के इन आरोपों के जवाब में सरकार की ओर से प्रक्रिया को प्रतिस्पर्धी और नियमों के अनुरूप बताया गया है।
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