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राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ अधिवक्ताओं का विरोध सोमवार को तेज हो गया। जयपुर और जोधपुर दोनों पीठों में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया। जोधपुर की दोनों प्रमुख बार एसोसिएशनों ने 6 सितंबर तक न्यायिक कार्य से पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया है।

वकीलों की मुख्य मांग है कि न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद से हटाया जाए, उनकी न्यायिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारियां वापस ली जाएं और राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाए।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की शिकायत के बाद विवाद

यह विरोध उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति संदीप मेहता द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को भेजे गए पत्रों के बाद सामने आया है।

न्यायमूर्ति मेहता ने न्यायमूर्ति शर्मा पर प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग और मामलों की सूची तैयार करने में कथित अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय के लिए किसी अन्य उच्च न्यायालय से स्थायी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का अनुरोध भी किया।

न्यायमूर्ति मेहता ने अपने पत्रों में न्यायमूर्ति शर्मा की न्यायिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर शिकायतों का उल्लेख किया है। हालांकि, ये सभी आरोप हैं और इन पर अभी कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।

मुख्य न्यायाधीश ने जवाब का अवसर देने की बात कही

मामला सार्वजनिक होने के बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि आरोपों पर संस्थागत प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा और न्यायमूर्ति शर्मा को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

इसलिए सार्वजनिक रूप से सामने आए आरोपों को अभी न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

जयपुर में प्रदर्शन, पुलिस बुलानी पड़ी

जयपुर में अधिवक्ताओं ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अदालत के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बुलाया गया।

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने न्यायिक प्रशासन में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग उठाई।

जोधपुर में 6 सितंबर तक न्यायिक कार्य का बहिष्कार

जोधपुर में राजस्थान उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ और राजस्थान उच्च न्यायालय वकील संघ ने आपात बैठक के बाद 6 सितंबर तक न्यायिक कार्य से दूर रहने का निर्णय लिया।

दोनों संगठनों ने कहा कि उनका कदम किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत अभियान नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा, निष्पक्षता, स्वतंत्रता और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए है।

अधिवक्ता लिपिक संघ, जोधपुर ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए न्यायिक कार्य में भाग नहीं लेने का निर्णय लिया है।

न्यायिक प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायिक प्रशासन और मामलों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

एक ओर उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्य न्यायाधीश ने निष्पक्ष संस्थागत प्रक्रिया और न्यायमूर्ति शर्मा को अपना पक्ष रखने का अवसर देने पर जोर दिया है।

इस बीच अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य बहिष्कार ने विवाद को और गंभीर बना दिया है ।

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