केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में जानकारी दी कि कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भगिरथ चौधरी ने अपने मंत्रालय की एक योजना के तहत अपने खीरे के फार्म के लिए प्राप्त ₹99 लाख की अनुदान राशि (सब्सिडी) वापस कर दी है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भगिरथ चौधरी ने संबंधित बैंक को अनुदान राशि लौटा दी है। साथ ही बैंक को निर्देश दिया गया है कि वह यह राशि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) को वापस हस्तांतरित करे।
रामनाथ ठाकुर ने यह भी बताया कि राजस्थान के जालौर से भारतीय जनता पार्टी सांसद लुंबाराम चौधरी ने भी पिछले पाँच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त की है।
क्या है खीरा अनुदान विवाद?
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब यह सामने आया कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है, की एक योजना के तहत भगिरथ चौधरी के व्यावसायिक खीरा फार्म को ₹99 लाख की अनुदान राशि मिली थी।
यह योजना एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत संचालित होती है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2014-15 में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक बागवानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत सब्जियों, फूलों तथा अन्य बागवानी फसलों की व्यावसायिक खेती के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
विपक्ष ने इस मामले में हितों के टकराव का मुद्दा उठाया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने लोकसभा को बताया कि संबंधित मंत्री ने प्राप्त अनुदान राशि वापस कर दी है और राशि को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड को लौटाने की प्रक्रिया जारी है।
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