अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग सेक्टर में चीन द्वारा भारतीय सेना की ऐतिहासिक गश्ती चौकियों तक पहुंच कथित रूप से रोकने की खबरों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इन गंभीर घटनाक्रमों पर तत्काल देश को स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग के अध्यक्ष सलमान खुर्शीद ने कहा कि पार्टी उन रिपोर्टों को लेकर बेहद चिंतित है, जिनमें दावा किया गया है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास तक्सिंग क्षेत्र में भारत की पारंपरिक गश्त वाले इलाकों तक पहुंच सीमित कर दी है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सवाल उठाते हुए कहा, “गलवान के बाद अब अरुणाचल प्रदेश?” उन्होंने कहा कि ऐसी परेशान करने वाली रिपोर्टें सामने आ रही हैं कि चीन अरुणाचल प्रदेश के उन इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जो भारत का अभिन्न हिस्सा हैं।
तक्सिंग और शे-5 को लेकर सवाल
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने तक्सिंग के पास अपनी मौजूदगी बढ़ाई है और क्या भारत ने शेरा-5, जिसे एक निर्धारित पेट्रोलिंग प्वाइंट बताया गया है, तक नियमित पहुंच खो दी है।
पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि संवेदनशील क्षेत्र में सर्दियों के दौरान भारतीय गश्त कथित रूप से सीमित क्यों रहती है, जबकि पीएलए पूरे साल वहां मौजूद रहती है। कांग्रेस के मुताबिक, इसका असर स्थानीय समुदायों के पारंपरिक चराई और शिकार के क्षेत्रों तक पहुंच पर भी पड़ रहा है।
पूर्वी लद्दाख पर भी सरकार से जवाब मांगा
कांग्रेस ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या मई 2020 से पहले की स्थिति पूर्वी लद्दाख में पूरी तरह बहाल हो चुकी है। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार वास्तविक स्थिति से जुड़े तथ्यों को छिपा रही है और संसद को यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही कि भारत को उन सभी क्षेत्रों और पेट्रोलिंग प्वाइंट्स तक अब भी पूरी पहुंच हासिल है या नहीं, जहां भारतीय सैनिक मई 2020 से पहले नियमित रूप से गश्त करते थे।
कांग्रेस ने 2020 के गलवान संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि उस घटना में भारत के 20 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी पर चीन को “क्लीन चिट” देने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का पिछला रिकॉर्ड भरोसा पैदा नहीं करता।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और गृह मंत्री से इन मुद्दों पर देश के सामने जवाब रखने की मांग की है। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसे भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और क्षमता पर पूरा भरोसा है और देश चीनी आक्रामकता के खिलाफ अपने सैनिकों के साथ मजबूती से खड़ा है।
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