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दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष एनआईए अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने-अपने देशों में परिवार से मिलने की अनुमति दी है। अदालत ने उनके पासपोर्ट जारी करने का निर्देश भी दिया है। वैनडाइक को अमेरिका और छह यूक्रेनी नागरिकों को यूक्रेन जाने की अनुमति कुछ शर्तों और औपचारिकताओं के साथ दी गई है। सातों को डिफॉल्ट जमानत भी मिल चुकी है।

एनआईए ने सातों को मार्च 2026 में कथित आतंकवादी गतिविधियों की साजिश के मामले में गिरफ्तार किया था। मामले में शुरुआत में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 18 लगाई गई थी। एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश किया था और वहां म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों के लिए ड्रोन युद्धक प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया था। ये आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं और अदालत द्वारा दोषसिद्धि नहीं की गई है।

8 सितंबर को दाखिल आरोपपत्र में एनआईए ने सातों के खिलाफ यूएपीए की धाराएं नहीं लगाईं और आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम, 2025 की धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। एनआईए ने अदालत को बताया कि यूएपीए से संबंधित जांच अभी जारी है और आवश्यकता पड़ने पर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है। 180 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद यूएपीए के तहत आरोपपत्र दाखिल नहीं होने के कारण अदालत ने सातों को डिफॉल्ट जमानत दी।

पवन खेड़ा का केंद्र पर हमला

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने वैनडाइक को अमेरिका जाने की अनुमति दिए जाने पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। खेड़ा ने आरोप लगाया कि वैनडाइक बिना आवश्यक अनुमति के मिजोरम में दाखिल हुआ, वहां से म्यांमार गया, सशस्त्र समूहों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया और फिर भारतीय क्षेत्र में वापस आया।

खेड़ा ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को अमेरिका जाने दिया गया, जबकि अमेरिका ने भारतीय नागरिकों को हथकड़ियों में और सैन्य विमानों से भारत भेजा था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की सत्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में काम कर रही है।

खेड़ा ने अपने बयान में प्रधानमंत्री के लिए “56 इंच का सीना रखने वाला कागजी शेर” जैसी टिप्पणी की और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री “समझौता कर चुके हैं”।

अमेरिकी राजनयिक हस्तक्षेप का भी दावा

वैनडाइक के परिवार की ओर से पहले अमेरिकी राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की गई थी। उसके परिवार की ओर से दावा किया गया था कि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को वैनडाइक की स्थिति से अवगत कराया था।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी वैनडाइक की रिहाई और घटनाक्रम के समय को लेकर केंद्र से सवाल किए हैं तथा अमेरिकी दबाव की भूमिका का आरोप लगाया है।

अदालत के आदेश के अनुसार, सातों को एक महीने के लिए विदेश जाने की अनुमति दी गई है और उन्हें जांच में सहयोग करना होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने उन्हें स्थायी रूप से भारत से मुक्त नहीं किया है बल्कि निर्धारित अवधि के लिए यात्रा की अनुमति दी है।

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