वरिष्ठ पत्रकार परनजॉय गुहा ठाकुरता ने डिजिटल पब्लिशर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (डिजीपब) के सदस्यों से पत्रकार रवि नायर के मामले में आवाज उठाने की अपील की है। उन्होंने गुजरात में नायर की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
गुहा ठाकुरता ने कहा कि उनके सहयोगी, सह-लेखक और मित्र रवि नायर 17 सितंबर से जेल में हैं। नायर को अडाणी एंटरप्राइजेज की आपराधिक मानहानि शिकायत से जुड़े मामले में गांधीनगर की अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के बाद हिरासत में लिया गया था।

नायर को फरवरी 2026 में मानहानि के मामले में दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। बाद में अपील लंबित रहने के दौरान उनकी सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दी गई थी।
नायर की ओर से अधिवक्ता अभिक चिमनी ने गुजरात उच्च न्यायालय में दलील दी कि गैर-जमानती वारंट जारी करने से पहले समन या जमानती वारंट जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि नायर ने तय तारीखों में कई बार अदालत में उपस्थिति दर्ज कराई थी और कुछ मौकों पर उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट भी मिली थी।
गुहा ठाकुरता ने अपनी अपील में सवाल उठाया कि बिना पूर्व सूचना या पहले जमानती वारंट जारी किए गैर-जमानती वारंट कैसे जारी किया जा सकता है। उन्होंने डिजीपब के सदस्यों से मामले के सभी तथ्यों की जांच कर एक साथी पत्रकार के पक्ष में आवाज उठाने का आग्रह किया है।
हालांकि, मामले की न्यायिक स्थिति पर एक महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि 23 सितंबर को गुजरात उच्च न्यायालय ने नायर को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और गैर-जमानती वारंट को चुनौती देने वाली याचिका पर आदेश 30 सितंबर के लिए सुरक्षित कर लिया। अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और आदेश सुनाया जाना बाकी है।
नायर की ओर से दायर नियमित जमानत याचिका गांधीनगर सत्र अदालत में भी लंबित बताई गई है। उच्च न्यायालय की सुनवाई के दौरान इस याचिका के लंबित होने का मुद्दा भी सामने आया।
गुहा ठाकुरता ने अपने संदेश में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर न्यायिक प्रक्रिया, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकारों के संदर्भ में सार्वजनिक रूप से सवाल उठाने की अपील की है। उनके संदेश में अडाणी समूह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच निकटता का भी उल्लेख किया गया है।
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