Screenshot

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ग्रीन इंडिया मिशन से संबंधित परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट ने केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी पर्यावरण कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट 13 अगस्त 2026 को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, मिशन के तहत वर्ष 2025 तक वन क्षेत्र में 14 लाख हेक्टेयर की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन यह लक्ष्य करीब 97.57 फीसदी तक अधूरा रह गया।

रिपोर्ट में मिशन के कमजोर प्रदर्शन के लिए अपर्याप्त योजना, विभिन्न विभागों के बीच कमजोर समन्वय और सीमित बजटीय सहायता को प्रमुख कारण बताया गया है। CAG ने सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि कुछ आंकड़ों में बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए गए हैं और उनके समर्थन में पर्याप्त सत्यापन योग्य प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

2010 में हुई थी मिशन की शुरुआत

ग्रीन इंडिया मिशन की अवधारणा वर्ष 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (NAPCC) के तहत की गई थी। मिशन का उद्देश्य वन क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना था।

कांग्रेस का आरोप है कि 2014-15 के बाद नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में मिशन का क्रियान्वयन अपेक्षित गति से नहीं हो सका। पार्टी के मुताबिक, CAG रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है कि कई स्थानों पर सही तरीके से लैंडस्केप का चयन नहीं किया गया, निगरानी व्यवस्था कमजोर रही और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई।

करोड़ों की बुनियादी सुविधाएं बेकार

ऑडिट में ऐसे मामलों की ओर भी संकेत किया गया है जहां मिशन के तहत करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई बुनियादी सुविधाओं का समुचित उपयोग नहीं हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इससे सरकारी धन के इस्तेमाल और परियोजनाओं की निगरानी पर गंभीर सवाल उठते हैं।

कांग्रेस ने कहा कि एक दशक किसी भी सरकारी योजना के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए पर्याप्त समय होता है। पार्टी ने CAG रिपोर्ट के आधार पर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ग्रीन इंडिया मिशन का प्रदर्शन उसके बड़े-बड़े दावों के अनुरूप नहीं रहा।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!