कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन फॉर्म-6 में कथित तौर पर “अवैध” बदलाव किया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग से सवाल किया कि यह बदलाव करने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को आदेश किस अधिकारी ने दिया और कंपनी में इस बदलाव को मंजूरी किसने दी।
राहुल गांधी ने कहा कि मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया से जुड़े इस बदलाव को लेकर जवाबदेही तय होना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग की ओर से टीसीएस को ऐसा बदलाव करने का निर्देश किस स्तर पर दिया गया और टीसीएस में किस अधिकारी ने इसे स्वीकृति दी।
उन्होंने इस पूरे मामले में आदेश देने वाले अधिकारी और बदलाव को मंजूरी देने वाले व्यक्ति के नाम सार्वजनिक किए जाने की मांग की।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण और ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहा है। हालांकि, फॉर्म-6 में कथित बदलाव और उसे “अवैध” बताए जाने के संबंध में चुनाव आयोग या टीसीएस का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है ।
बेलगावी में 15 हजार मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में मतदाता सूची से छेड़छाड़ को लेकर व्यापक आक्रोश के बावजूद भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग कथित तौर पर वही प्रक्रिया जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कर्नाटक के बेलगावी का उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 15 हजार मतदाताओं के नाम एक साथ हटाने की कोशिश की गई।
उनके मुताबिक, 22, 23 और 24 सितंबर को केवल तीन दिनों में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन सामने आए। राहुल गांधी ने दावा किया कि इनमें मुस्लिम, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े मतदाताओं को निशाना बनाया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने का तरीका पहले भी उनके द्वारा उजागर किया जा चुका है। उनके अनुसार, सॉफ्टवेयर के जरिए केंद्रीकृत तरीके से चुनिंदा मतदाताओं को निशाना बनाकर बड़ी संख्या में फॉर्म-7 भरे जा सकते हैं और इसके परिणामस्वरूप बहुत कम समय में बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया के शीर्ष स्तर से नियंत्रित होने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक कांग्रेस के नेता इस मामले में कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्राथमिकी दर्ज करने से क्यों इनकार कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के माध्यम से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और इसे “देशद्रोह” बताया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और सरकारी गवाह बनने की मांग करते हुए मोदी और शाह के खिलाफ जांच की मांग भी दोहराई।
फॉर्म-6 विवाद पर चुनाव आयोग का पक्ष
फॉर्म-6 में एसआईआर से संबंधित अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी मतभेद सामने आने की खबरें आई हैं। चुनाव आयोग ने एसआईआर पूरी कर चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म-6 से इस अतिरिक्त घोषणा को हटाने का फैसला किया है। आयोग ने यह भी कहा है कि उसके आदेश वैधानिक प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं और संस्थागत विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना सामान्य है।
नोट: बेलगावी में 15 हजार नाम हटाने, समुदायों को लक्षित करने और भाजपा-चुनाव आयोग की मिलीभगत संबंधी बातें राहुल गांधी के आरोप हैं; इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि उनके बयान के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
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