अमेरिका की एक संघीय अदालत ने उद्योगपति गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ कथित 25 करोड़ डॉलर (लगभग ₹2,000 करोड़) के रिश्वत एवं धोखाधड़ी मामले में आरोपपत्र (इंडिक्टमेंट) को तत्काल खारिज करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा मामला वापस लेने के लिए दिया गया कारण पर्याप्त नहीं है और इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाए।

न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी जिला अदालत के न्यायाधीश निकोलस जी. गराउफिस ने कहा कि न्याय विभाग की ओर से दायर आवेदन में मामले को समाप्त करने के पीछे दिए गए कारण “संक्षिप्त, सामान्य और निष्कर्षात्मक” हैं, जिनके आधार पर अदालत अंतिम निर्णय नहीं दे सकती। अदालत ने न्याय विभाग को निर्देश दिया है कि वह आरोपपत्र को स्थायी रूप से निरस्त (dismiss with prejudice) करने के प्रत्येक आधार का तथ्यात्मक समर्थन सहित विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करे। इसके लिए 13 जुलाई तक का समय दिया गया है।

यह मामला वर्ष 2024 में दर्ज किया गया था। आरोप था कि गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अन्य आरोपियों ने भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े अनुबंध हासिल करने के लिए राज्य सरकारों के अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश रची तथा अमेरिकी निवेशकों के समक्ष भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की। अभियोजन पक्ष का दावा था कि लगभग ₹2,029 करोड़ की रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी, जिसमें से करीब ₹1,750 करोड़ आंध्र प्रदेश के अधिकारियों के लिए निर्धारित थे ताकि 7 गीगावॉट सौर ऊर्जा खरीद समझौते सुनिश्चित किए जा सकें।

हालांकि अमेरिकी न्याय विभाग पहले ही अदालत को बता चुका है कि वह इस आपराधिक मुकदमे को आगे नहीं बढ़ाना चाहता, लेकिन न्यायाधीश के आदेश के बाद मामला औपचारिक रूप से अभी समाप्त नहीं हुआ है। अदालत की अंतिम मंजूरी मिलने तक आरोप लंबित रहेंगे।

उधर, गौतम अदाणी की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि यह मामला अमेरिकी कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और अभियोजन पक्ष भारत में कथित रिश्वत के आरोपों को कानूनी रूप से सिद्ध नहीं कर सकेगा। इसलिए आरोपपत्र को स्थायी रूप से निरस्त किया जाना चाहिए।

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