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कोयला खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए संचालित प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के तहत छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में वर्ष 2015-16 से 2023-24 के दौरान जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) के ₹13,101 करोड़ के उपयोग में नियमों के उल्लंघन, धन के दुरुपयोग, निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में गड़बड़ियों और पारदर्शिता की कमी की ओर संकेत किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 11 जिलों के 1,734 प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित गांवों में से 754 गांव, ₹4,536.58 करोड़ खर्च किए जाने के बावजूद, योजना के लाभ से वंचित रहे। CAG ने इसे योजना के उद्देश्यों के प्रभावी क्रियान्वयन में गंभीर कमी बताया है।

ऑडिट में यह भी सामने आया कि नियमों में संशोधन कर योजना के दायरे का विस्तार किया गया और ₹709.47 करोड़ की राशि विभिन्न वस्तुओं के निःशुल्क वितरण पर खर्च की गई। रिपोर्ट के अनुसार, ₹28.11 करोड़ मूल्य की सामग्री बिना निर्धारित मानकों और लाभार्थियों की उचित पहचान के वितरित की गई, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए हैं।

CAG ने यह भी पाया कि खनन से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और अधिसूचना जारी करने में गंभीर देरी हुई, जिसके कारण पात्र क्षेत्रों और लोगों तक योजना का लाभ समय पर नहीं पहुंच सका।

रिपोर्ट में DMFT निधियों के उपयोग, परियोजनाओं के चयन, टेंडर प्रक्रिया और लाभार्थियों की पहचान में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही तथा नियमों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। CAG के निष्कर्षों के बाद राज्य में DMFT निधियों के प्रबंधन और योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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