देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों से आम जनता पहले ही परेशान है। इसी बीच सरकारी तेल कंपनियों के रिकॉर्ड मुनाफे के आंकड़ों ने महंगाई और ईंधन कीमतों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां — इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड— ने जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में संयुक्त रूप से ₹19,470 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 41 प्रतिशत अधिक है।

वहीं पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में इन कंपनियों का कुल मुनाफा बढ़कर ₹77,280.65 करोड़ पहुंच गया, जो 2024-25 के ₹33,601.57 करोड़ की तुलना में लगभग 130 प्रतिशत ज्यादा है।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के बावजूद तेल कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया। बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन, ईंधन की मजबूत मांग और बाजार परिस्थितियों को इसके पीछे मुख्य कारण माना जा रहा है।

हालांकि दूसरी ओर आम लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ रहा है, जिससे सब्जियों, खाद्यान्न, स्कूल बस, ऑटो किराया और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें भी मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के बजट पर भारी पड़ रही हैं।

प्रमुख शहरों में वर्तमान ईंधन कीमतें

 

आर्थिक जानकारों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर पूरे बाजार पर पड़ता है क्योंकि माल ढुलाई महंगी होने से हर वस्तु की कीमत बढ़ जाती है। किसान, छोटे व्यापारी, मजदूर, ऑटो चालक और नौकरीपेशा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

विपक्षी दलों और उपभोक्ता संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब तेल कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं तो आम लोगों को राहत क्यों नहीं दी जा रही। उनका कहना है कि सरकार को पेट्रोल-डीजल और गैस पर टैक्स कम कर जनता को राहत पहुंचानी चाहिए।

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी आने वाले समय में ईंधन कीमतों पर और दबाव बढ़ा सकती है। ऐसे में महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही है।

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