कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत में निजी क्षेत्र का मुनाफा 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और पिछले चार वर्षों में यह चार गुना बढ़ गया है। इसके बावजूद, श्रमिकों और कर्मचारियों के वेतन में केवल मामूली बढ़ोतरी हुई है।
रमेश ने कहा, “हर क्षेत्र में मजदूरी/वेतन की सालाना वृद्धि दर केवल 0.8% से 5.4% के बीच रही है। यह स्थिति न केवल असमानता को बढ़ा रही है, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा रही है।”
मुख्य आर्थिक सलाहकार के सुझाव का समर्थन
उन्होंने मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के हालिया सुझाव का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय उद्योग जगत को अपने अंदर झांकने की जरूरत है। “मुनाफे के रूप में पूंजी में जाने वाली आमदनी का हिस्सा और श्रमिकों को वेतन के रूप में जाने वाले हिस्से के बीच बेहतर संतुलन होना चाहिए।”
रमेश ने इस बात पर जोर दिया कि यदि सरकार ने 2019 में कॉर्पोरेट टैक्स में भारी कटौती नहीं की होती, तो नीतिगत माध्यम से इस असंतुलन को कुछ हद तक ठीक किया जा सकता था।
सरकार की नीतियों पर निशाना
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार की नीतियां केवल बड़े कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं। उन्होंने कहा, “कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स (PLI) के जरिए कॉर्पोरेट को उदार सहायता देने और वेतनभोगी मध्यम वर्ग पर कर का बोझ बढ़ाने की रणनीति ने निवेश या रोजगार में कोई उल्लेखनीय वृद्धि किए बिना केवल बड़े एकाधिकारवादियों को समृद्ध किया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ये नीतियां अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में पूरी तरह विफल रही हैं।
क्या करना चाहिए?
रमेश ने मांग की कि सरकार को अपनी प्राथमिकताएं बदलनी चाहिए और आम जनता के हित में नीतियां बनानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया:
1.मध्यम वर्ग के लिए कर में कटौती: इससे वेतनभोगी वर्ग के पास खर्च करने के लिए अधिक धन होगा, जो अर्थव्यवस्था में मांग को प्रोत्साहित करेगा।
2.गरीबों के लिए इनकम सपोर्ट: इससे सबसे कमजोर वर्ग को राहत मिलेगी और उनकी क्रय शक्ति में वृद्धि होगी।
आर्थिक असमानता को कम करने की आवश्यकता
रमेश ने कहा कि सरकार को निजी क्षेत्र के बढ़ते मुनाफे और मजदूरी में हो रही मामूली वृद्धि के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह असमानता जारी रही, तो देश की आर्थिक प्रगति में बड़ी बाधा आ सकती है।
रिपोर्ट के अंत में जयराम रमेश ने कहा, “दीवार पर लिखी इबारत स्पष्ट है। हमें समावेशी और न्यायसंगत नीतियों की आवश्यकता है, जो देश के हर वर्ग को आर्थिक वृद्धि का लाभ प्रदान कर सकें।”
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