रिलायंस इंडस्ट्रीज की ड्रोन इकाई एस्टेरिया एयरोस्पेस कथित रिश्वतखोरी मामले में जांच एजेंसियों के रडार पर है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोप लगाया है कि ड्रोन आयात मंजूरी जल्दी दिलाने के लिए रिश्वत देने की साजिश रची गई।

जांच एजेंसी ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के एक वरिष्ठ अधिकारी और रिलायंस से जुड़े एक अधिकारी/सलाहकार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि करीब 15 लाख रुपये की रिश्वत तीन ड्रोन आयात आवेदनों को मंजूरी दिलाने के लिए तय की गई थी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि गिरफ्तार व्यक्ति कंपनी का सलाहकार था और कंपनी को किसी अनधिकृत लेन-देन की जानकारी नहीं थी, न ही उसने ऐसी किसी गतिविधि को मंजूरी दी थी।

क्या है एस्टेरिया एयरोस्पेस?
एस्टेरिया एयरोस्पेस की स्थापना वर्ष 2011 में बेंगलुरु में हुई थी। रिलायंस ने 2019 में कंपनी का अधिग्रहण किया था। यह कंपनी कृषि, निर्माण, तेल-गैस, दूरसंचार और निगरानी जैसे क्षेत्रों के लिए ड्रोन समाधान उपलब्ध कराती है।

तेजी से बढ़ा कारोबार
भारत में 2021 के बाद ड्रोन नीति में ढील मिलने के बाद एस्टेरिया का कारोबार तेजी से बढ़ा। कंपनी की आय वित्त वर्ष 2020 में 1.1 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में लगभग 40 करोड़ रुपये तक पहुंचने की जानकारी है।

अदालत ने बढ़ाई हिरासत
दिल्ली की अदालत ने मामले में गिरफ्तार आरोपियों की न्यायिक हिरासत 6 मई 2026 तक बढ़ा दी है। फिलहाल दोनों आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया है।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!