ऑल इंडिया बैंकिंग ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (AIBOC) के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। इस बैठक में बैंक अधिकारियों ने बताया कि कैसे मोदी सरकार की नीतियां इन बैंकों को अपने मूल उद्देश्य से भटका रही हैं और जनता के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।

बैंकों को मुनाफा केंद्रित बनाने का आरोप

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अब जनता की सेवा करने के बजाय मुनाफा कमाने पर जोर देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे न केवल बैंक अपने सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में विफल हो रहे हैं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराना भी कठिन हो गया है।

कर्मचारियों पर बढ़ रहा है दबाव

AIBOC ने बताया कि बैंकों में कर्मचारियों की भारी कमी के बावजूद अधिकारियों से असंभव लक्ष्य पूरे करने की उम्मीद की जाती है। इसके अलावा, विषाक्त कार्य वातावरण और असमान प्रतिस्पर्धा ने कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और कामकाजी परिस्थितियों को और खराब कर दिया है।

महिला कर्मचारियों की समस्याएं

बैठक में महिला बैंक कर्मचारियों की समस्याओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि महिला कर्मचारियों को समान अवसर नहीं मिलते और उन्हें असंतुष्ट ग्राहकों के क्रोध का सामना करना पड़ता है। इसके चलते उनकी करियर प्रगति में बाधा आ रही है।

सरकार पर गंभीर आरोप

इस मौके पर श्री गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का उपयोग केवल “धनवान और प्रभावशाली कॉरपोरेट्स” के लिए निजी वित्तीय संस्थान के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये बैंक अब बड़े कॉरपोरेट घरानों को असीमित वित्तीय सहायता देने के साधन बन गए हैं, जबकि आम आदमी की जरूरतें अनसुनी रह जाती हैं।

उन्होंने यह भी कहा, “सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सिर्फ सरकार को लाभांश देने वाली इकाई नहीं हैं। इनका उद्देश्य समाज के हर तबके को वित्तीय सेवाएं प्रदान करना है। मोदी सरकार को PSBs को अपने धोखेबाज मित्रों के लिए धन का असीमित स्रोत बनने से रोकना चाहिए।”

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