छत्तीसगढ़ के ऊर्जा नगरी के रूप में प्रसिद्ध कोरबा ज़िले में इन दिनों बिजली व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ाई हुई नजर आ रही है। भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती ने आम नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। उपभोक्ता जहां एक ओर उमस और गर्मी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बार-बार बिजली गुल होने से उनकीपरेशानियां कई गुना बढ़ गई हैं।
स्थिति यह है कि हल्की सी आँधी या बारिश होते ही शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित हो जाती है। हैरानी की बात यह है कि शहर के मध्य स्थित रिहायशी इलाकों में भी हालात किसी गांव से बेहतर नहीं हैं।
मेंटेनेंस के बावजूद फेल हुई बिजली व्यवस्था
ऊर्जा नगरी कोरबा में बिजली व्यवस्था की बदहाल स्थिति अब आम लोगों के लिए रोज़ की परेशानी बनती जा रही है। ताज़ा मामले में 11 केवी आरपी नगर फीडर में आज सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक मेंटेनेंस के लिए शटडाउन लिया गया था। उम्मीद की जा रही थी कि मेंटेनेंस के बाद बिजली व्यवस्था सुचारू हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

शाम करीब 6:30 बजे हल्की आंधी और बारिश के बाद एक बार फिर बिजली गुल हो गई। चिंताजनक बात यह रही कि रात 8 बजे तक भी आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। इससे साफ है कि मेंटेनेंस कार्य का जमीनी असर नजर नहीं आ रहा है।शनिवार को भी घंटों ठप रही बिजली
इसी तरह पिछले शनिवार दोपहर करीब 3 बजे हल्की बारिश के बाद आर पी नगर फीडर में खराबी आ गई। ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से संदेश जारी कर बताया गया कि ब्रेकडाउन मेंटेनेंस के कारण शाम साढ़े 5 बजे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। हालांकि कई इलाकों में इससे भी अधिक समय तक बिजली गुल रही।

बारिश बन रही बड़ी वजह या बहाना?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब यह एक नियमित समस्या बन गई है—जैसे ही हल्की बारिश होती है, बिजली तुरंत चली जाती है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या बिजली ढांचा इतना कमजोर है कि मामूली मौसम बदलाव भी सहन नहीं कर पा रहा, या फिर मेंटेनेंस केवल कागजों तक सीमित है।
दिन में मेंटेनेंस, शाम को ब्रेकडाउन—लोगों में नाराज़गी
नागरिकों का कहना है कि दिनभर शटडाउन लेकर मेंटेनेंस किया जाता है, जिससे पहले ही लोगों को घंटों बिना बिजली रहना पड़ता है। इसके बावजूद शाम को मामूली मौसम बदलाव में फिर फॉल्ट आ जाना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का आरोप है कि बार-बार शटडाउन लेने के बावजूद न तो लाइनों की सही मरम्मत हो रही है और न ही उपकरणों को मजबूत किया जा रहा है।
लोगों की बढ़ती परेशानियां
- घंटों बिजली गुल रहने से घरों में पानी की सप्लाई बाधित
- भीषण गर्मी में पंखे-कूलर बंद, बच्चों और बुजुर्गों की हालत खराब
- मोबाइल चार्जिंग और इंटरनेट सेवाएं ठप
- दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान
- छात्रों की पढ़ाई प्रभावित
- इन्वर्टर और बैटरी भी जवाब देने लगे हैं, जिससे रात में अंधेरा छा जाता है
स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर
लगातार बिजली कटौती से लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे थकान, चिड़चिड़ापन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
शिकायतों पर नहीं हो रही सुनवाई
उपभोक्ताओं का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने पर “ब्रेकडाउन” का कारण बताकर शिकायतें दर्ज नहीं की जातीं, जिससे समस्या का आधिकारिक रिकॉर्ड ही नहीं बन पाता। ‘मोर बिजली’ ऐप और 1912 हेल्पलाइन होने के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिल रही।
जनता का सवाल
जब नियमित मेंटेनेंस के बाद भी पहली ही बारिश में बिजली व्यवस्था ठप हो जाती है, तो ऐसे मेंटेनेंस का क्या औचित्य है?
कोरबा जैसे ऊर्जा उत्पादन के केंद्र में यदि बिजली की यह हालत है, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि आम जनता के साथ अन्याय भी है। अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी ठोस और स्थायी समाधान सुनिश्चित करें, फीडर स्तर पर तकनीकी सुधार करें और जवाबदेही तय करें, ताकि लोगों को बार-बार इस परेशानी का सामना न करना पड़े।
नागरिकों में आक्रोश
स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऊर्जा उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाले कोरबा में ही यदि बिजली की ऐसी स्थिति है, तो यह बेहद विडंबनापूर्ण है। लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि गर्मी के इस मौसम में राहत मिल सके।
लगातार हो रही बिजली कटौती, शिकायतों का समाधान न होना और विभाग की उदासीनता ने कोरबा की जनता को मुश्किलों में डाल दिया है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है।
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