केंद्र सरकार द्वारा चारों श्रम संहिताओं (Labour Codes) को लागू किए जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा चुनाव समाप्त होने के तुरंत बाद 8 और 9 मई 2026 को राजपत्र अधिसूचनाओं के जरिए इन “श्रमिक विरोधी” कानूनों को लागू किया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इन श्रम संहिताओं के कारण देश के करोड़ों श्रमिकों को “हायर एंड फायर” नीति, ठेका रोजगार और यूनियन बनाने के सीमित अधिकारों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बिना किसी व्यापक परामर्श के इन कानूनों का मसौदा तैयार किया और लागू किया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने वर्ष 2015 के बाद से भारतीय श्रम सम्मेलन (Indian Labour Conference) तक नहीं बुलाया है।
कांग्रेस के अनुसार, ये श्रम संहिताएँ केवल बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं और यह स्वतंत्रता के बाद श्रमिक अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला है।
इस दौरान कांग्रेस ने अपने “श्रमिक न्याय” एजेंडा को दोहराते हुए श्रमिकों के लिए पांच प्रमुख वादों की घोषणा की। पार्टी ने मनरेगा की बहाली और इसे शहरी क्षेत्रों तक विस्तारित करने, सभी श्रमिकों के लिए प्रतिदिन ₹400 की राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय करने, “राइट टू हेल्थ” कानून के तहत ₹25 लाख तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज देने, असंगठित श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सरकारी मुख्य कार्यों में ठेका प्रथा पर रोक लगाने का संकल्प दोहराया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनकी पार्टी देश के श्रमिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी।
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