ओडिशा के भुवनेश्वर के बाहरी इलाके बालीअंता क्षेत्र में रेलवे पुलिस (GRP) के कांस्टेबल सौम्या रंजन स्वैन की कथित मॉब लिंचिंग ने पूरे देश को झकझोर दिया है। घटना 7 मई को हुई, जब सौम्य रंजन अपने सहयोगी ओम प्रकाश राउत के साथ आधिकारिक काम से जा रहे थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार रास्ते में उनकी बाइक का दो युवतियों के स्कूटर से विवाद और टक्कर हो गई। इसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि भीड़ ने दोनों युवकों को पकड़कर बेरहमी से पीटा। सौम्य रंजन को रस्सी से बांधकर हमला किए जाने की भी बात सामने आई है। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई, जबकि उनका साथी बच निकला।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारी आक्रोश फैल गया। मृतक के परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उन्हें बचाने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया।
पुलिस ने मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है और वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। भुवनेश्वर डीसीपी जगमोहन मीणा ने बताया कि मामले में सड़क हादसा, महिलाओं की शिकायत और उसके बाद भीड़ की हिंसा—तीनों पहलुओं की जांच की जा रही है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माँझी ने घटना पर दुख जताते हुए डीजीपी को कड़ी कार्रवाई और विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। माँझी के सत्ता में आने के बाद माँबलिंचिग के अनेकों मामले सामने आये हैं जो चिंता की बात है ।
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि भीड़तंत्र और इंसानियत के पतन का भयावह उदाहरण है। कानून हाथ में लेने वाली भीड़ जब न्याय करने लगती है, तब समाज सभ्य नहीं रह जाता।
किसी भी परिस्थिति में हिंसा और मॉब लिंचिंग को सही नहीं ठहराया जा सकता। एक इंसान को इस तरह पीट-पीटकर मार देना बेहद शर्मनाक और अमानवीय है।
एक सभ्य समाज में न्याय अदालत और कानून करते हैं, भीड़ नहीं। ऐसी घटनाएँ हम सभी को आत्ममंथन करने पर मजबूर करती हैं कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं।
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