छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक और हाथी की मौत का मामला सामने आया है, जिसमें जानबूझकर करंट प्रवाहित तारों का इस्तेमाल किया गया। वन विभाग के अधिकारियों की जानकारी के अनुसार, आरोपित ने सुनियोजित तरीके से यह कदम उठाया, जिससे हाथी की जान चली गई। इस घटना के बाद स्थानीय वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और दोषी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया, जिसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

घटना बलरामपुर जिले के चलगली वन परिक्षेत्र के मुरका और आस-पास के गांवों में हुई, जहां पिछले तीन दिनों से एक वयस्क हाथी विचरण कर रहा था। इस दौरान हाथी ने फसलों को भी नुकसान पहुंचाया, जिससे ग्रामीणों में डर और असंतोष बढ़ गया था। सोमवार सुबह ग्रामीणों ने हाथी को एक धान के खेत में निष्क्रिय अवस्था में देखा। शुरुआत में उन्हें लगा कि वह बैठा हुआ है, लेकिन पास जाकर देखने पर उसकी मृत्यु का पता चला।

छत्तीसगढ़ में हाल ही में वन्यजीवों के खिलाफ बढ़ती घटनाओं के बीच यह घटना एक और दुखद उदाहरण है। कुछ ही दिन पहले राज्य में एक बाघ की मौत हुई थी, और अब हाथी की इस तरह से मृत्यु ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 26 अक्टूबर को रायगढ़ जिले के तमनार वन परिक्षेत्र में बिजली करंट से तीन हाथियों की मौत हो गई थी। रविवार को सूरजपुर के वनांचल में पण्डों जनजाति के भाई बहनों को हाथियों ने पटक पटककर मार डाला था। परिवार के तीन सदस्यों ने भागकर जान बचाई थी।हसदेव अरण्य जैसे क्षेत्रों में खनन और मानव-हाथी संघर्ष पहले से ही जंगल के जानवरों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है, और अब इस तरह की घटनाएं वन्यजीवों के प्रति मानव हस्तक्षेप की गंभीरता को उजागर कर रही हैं।

वन विभाग के अधिकारियों ने पोस्टमार्टम के बाद हाथी के शव को मौके पर ही दफना दिया। मामले की जांच जारी है, और अधिकारियों का कहना है कि दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जा सकें।

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