वरिष्ठ पत्रकार परनॉय गुहा ठाकुरता ने मंगलवार को एक सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि उनके खिलाफ अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा दायर मानहानि मुकदमों में लगाए गए आरोप “झूठे, निराधार और दुर्भावनापूर्ण” हैं। उन्होंने साफ किया कि वह अपने सभी लेखन और विश्लेषण के पीछे खड़े हैं और अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे।

गुहा ठाकुरता ने बताया कि शनिवार, 6 सितंबर को दिल्ली की रोहिणी अदालत ने एक एक्स-पार्टी अंतरिम निषेधाज्ञा (ex parte interim injunction) पारित की। यह आदेश उनके पक्ष को सुने बिना ही दिया गया। मामला उनके द्वारा अदाणी समूह पर की गई रिपोर्टिंग और विश्लेषण से जुड़ा है।

सातवां मुकदमा

पत्रकार ने कहा, “यह 2017 से अब तक अदाणी समूह की कंपनियों द्वारा मेरे खिलाफ दायर सातवां मानहानि मामला है। इनमें से पाँच गुजरात में, एक राजस्थान में और ताज़ा दिल्ली में लंबित हैं।”

गुहा ठाकुरता के साथ स्वतंत्र पत्रकार रवि नायर, अबीर दासगुप्ता, अयस्कांत दास और आयुष जोशी भी इस मुकदमे में प्रतिवादी बनाए गए हैं।

पत्रकारिता का लंबा सफर

गुहा ठाकुरता लगभग 50 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं। उन्होंने प्रिंट, प्रसारण और डिजिटल मीडिया में काम किया है और सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) से 35 साल से अधिक समय से मान्यता प्राप्त हैं। वे लेखक, प्रकाशक, डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माता और शिक्षक भी हैं।

अदाणी समूह के आरोप और प्रतिक्रिया

मीडिया रिपोर्टों के हवाले से उन्होंने बताया कि अदाणी समूह की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा प्रकाशित रिपोर्टें “झूठी, अप्रमाणित और राष्ट्रविरोधी हितों से प्रेरित” हैं, जिनके कारण समूह की परियोजनाएँ बाधित हुईं और निवेश योजनाएँ प्रभावित हुईं।

इस पर गुहा ठाकुरता ने कड़े शब्दों में कहा:

“मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूँ कि ये आरोप बेबुनियाद और अपमानजनक हैं। मेरी सभी रिपोर्टें तथ्यपरक, निष्पक्ष, संतुलित और जनहित में हैं।”

न्यायपालिका पर भरोसा

अपने बयान के अंत में उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे सभी मुकदमों का कानूनी तौर पर डटकर मुकाबला करेंगे।

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