साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के कुसमुंडा क्षेत्र में ट्रेड यूनियन गतिविधियों के बीच एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। हिंद मज़दूर सभा(एचएमएस) से जुड़े कई सदस्यों ने साउथ ईस्टर्न कोयला मज़दूर कांग्रेस (एसईकेएमसी) (इंटक से संबद्ध) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम को क्षेत्र की श्रमिक राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

कुसमुंडा स्थित ट्रेड यूनियन कार्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में एचएमएस के वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता सुरजीत सिंह (हैप्पी) के नेतृत्व मे कई सदस्यों ने औपचारिक रूप से एसईकेएमसी की सदस्यता ग्रहण की। कार्यक्रम की अध्यक्षता एसईकेएमसी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं स्टीयरिंग कमेटी सदस्य गोपाल नारायण सिंह ने की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसईकेएमसी कुसमुंडा के महासचिव राजूलाल सोनी ने कहा कि संगठन का लक्ष्य कुसमुंडा क्षेत्र में सर्वाधिक सदस्यता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य गोपाल नारायण सिंह के नेतृत्व और मार्गदर्शन में अवश्य पूरा होगा।

सुरजीत सिंह (हैप्पी) ने अपने संबोधन में कहा कि वे संगठन के प्रति पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे और अपनी सर्वोत्तम क्षमता से संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में योगदान देंगे।

वहीं कुसमुंडा क्षेत्र के अध्यक्ष बृजलाल पनिका ने इस कार्यक्रम को ट्रेड यूनियन आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के जुड़ाव से न केवल संगठन मजबूत होता है, बल्कि श्रमिकों की आवाज भी और प्रभावी ढंग से उठाई जा सकती है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एसईकेएमसी के अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि यह आयोजन एक आदर्श ट्रेड यूनियन की कार्यप्रणाली का प्रतीक है। उन्होंने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि वे कर्मचारियों के कल्याण के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे और संगठन को और अधिक सशक्त बनाएंगे।

इस अवसर पर एसईकेएमसी के कई प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें संदीप राय (कोरबा) , संजीव शर्मा (दिपका), संदीप चौधरी कोषाध्यक्ष, एन.के. सिंह (कुसमुंडा) तथा पार्षद धनंजय दीवान शामिल थे। कार्यक्रम में अच्छी संख्या में श्रमिकों की उपस्थिति ने आयोजन को खास बना दिया।

कार्यक्रम के सफल संचालन अध्यक्ष बृजलाल रविकांत ने की और समन्वय में निर्मल चंद्रा, उवैस अहमद, मंतोष, महेश साहू तथा अन्य कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनके प्रयासों से आयोजन सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संपन्न हुआ।

इस घटनाक्रम को कुसमुंडा क्षेत्र में ट्रेड यूनियनों के बदलते समीकरणों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में श्रमिक राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

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