इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, ‘गहरे दुख’ का किया उल्लेख

नई दिल्ली/प्रयागराज, 10 अप्रैल 2026:  जस्टिस यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 9 अप्रैल को अपना इस्तीफा राष्ट्रपति  द्रोपदी मुरमू को सौंपा।

अपने इस्तीफे में जस्टिस वर्मा ने लिखा, “मैं गहरे दुख के साथ अपना इस्तीफा दे रहा हूं।” उनके इस संक्षिप्त लेकिन भावुक बयान ने न्यायिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

कैश विवाद से जुड़ा मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस वर्मा का नाम उस कथित ‘कैश बरामदगी’ विवाद में सामने आया था, जिसमें उनके आधिकारिक आवास पर आग लगने की घटना के बाद बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई थी। इस घटना के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था।

हालांकि जस्टिस वर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए किसी भी तरह की जानकारी होने से इंकार किया था और इसे साजिश बताया था, लेकिन मामला लगातार गंभीर होता गया।

महाभियोग प्रक्रिया और जांच

इस विवाद के बाद संसद में उनके खिलाफ महाभियोग (इम्पीचमेंट) की प्रक्रिया शुरू हुई थी और एक जांच समिति गठित की गई थी। बताया जा रहा है कि जस्टिस वर्मा को इसी जांच समिति के सामने अपना पक्ष रखना था, लेकिन उससे ठीक पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस्तीफा देने से महाभियोग की प्रक्रिया स्वतः समाप्त हो जाती है।

पहले हुआ था तबादला

विवाद के बीच जस्टिस वर्मा का तबादला  दिल्ली हाईकोर्ट t से  इलाहाबाद हाईकोर्ट किया गया था, जिसने इस मामले को और सुर्खियों में ला दिया।

यह मामला न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। इसे हाल के वर्षों में किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जुड़ा सबसे बड़ा विवाद माना जा रहा है।

फिलहाल इस मामले में आगे की कार्रवाई और आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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