Screenshot

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2003 के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटते हुए उसे “गलत, अवैध और साक्ष्यों के विपरीत” बताया।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा:

“हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी करने का फैसला स्पष्ट रूप से अवैध, गलत, विकृत और उपलब्ध साक्ष्यों के विपरीत है।”

अदालत ने यह भी माना कि निचली अदालत ने बिना ठोस आधार के आरोपी को बरी किया था, जिसे अब निरस्त किया जाता है।

2003 का हाई-प्रोफाइल हत्या मामला

यह मामला वर्ष 2003 में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की हत्या से जुड़ा है, जो लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना रहा।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

फैसले के बाद अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • हाईकोर्ट ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते समय उन्हें सुना नहीं
  • 25 मार्च और 1 अप्रैल के आदेश “प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ” हैं

अमित जोगी ने कहा:

“सुप्रीम कोर्ट ने मेरी बात सुनी है और दोनों आदेशों—लीव टू अपील और अपील—को संयुक्त रूप से 20 अप्रैल को सुनने का निर्देश दिया है। मुझे उम्मीद है कि मेरे साथ अन्याय नहीं होगा।”

परिवार की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, दिवंगत नेता रामअवतार जग्गी के बेटे ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे “न्याय की जीत” बताया है।

आगे क्या?

अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में होगी, जहां हाईकोर्ट के फैसले की वैधता पर अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!