सुप्रीम कोर्ट की एक अहम बेंच ने अरुणाचल प्रदेश में कथित ठेके आवंटन मामले को लेकर बड़ा आदेश दिया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की खंडपीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को भी निर्देशित किया है कि वह संबंधित सभी दस्तावेज और सूचनाएं CBI को उपलब्ध कराए। साथ ही, CBI को 16 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
क्या हैं आरोप?
मामला राज्य में हजारों करोड़ रुपये के ठेकों के आवंटन से जुड़ा है। आरोप है कि पेमा खांडू और उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को बड़े पैमाने पर सरकारी ठेके दिए गए।
याचिका में दावा किया गया है कि:
- चार कंपनियों को कुल 146 कार्य ठेके दिए गए
- इन ठेकों की कुल राशि लगभग 383.74 करोड़ रुपये बताई गई
- ये ठेके मुख्य रूप से तवांग जिला में वर्ष 2012 से 2023 के बीच दिए गए
इनमें:
- दो कंपनियां मुख्यमंत्री की पत्नी त्सेरिंग डोल्मा के स्वामित्व में बताई गई हैं
- एक-एक कंपनी उनके भाई ताशी खांडू और भाभी नीमा ड्रेमा से जुड़ी बताई गई है
अदालत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच एजेंसी से प्रारंभिक जांच कराना जरूरी माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
आगे क्या?
अब CBI इस मामले में:
- दस्तावेजों की जांच करेगी
- ठेकों के आवंटन की प्रक्रिया का परीक्षण करेगी
- संभावित हितों के टकराव (conflict of interest) की जांच करेगी
16 सप्ताह बाद पेश होने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय हो सकती है।
यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इसमें शीर्ष स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता के सवाल उठ रहे हैं।
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