रिपोर्टर्स कलेक्टिव की जांच में दावा—5 साल में ₹12,500 से ₹19,000 करोड़ तक का संभावित बोझ

 

एक नई जांच रिपोर्ट में आसम और आदानी ग्रुप के बीच हुए बिजली समझौते को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने चुनाव से कुछ महीने पहले नवंबर 2025 में 3,200 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीदने के लिए अदाणी समूह को लेटर ऑफ अवॉर्ड जारी किया।

जांच में सामने आया है कि इस समझौते में ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत यदि राज्य सरकार बिजली का उपयोग नहीं करती है, तब भी उसे अदाणी समूह को भुगतान करना होगा।

रिपोर्ट में उपलब्ध सरकारी दस्तावेज़ों और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरणके आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि असम सरकार को अगले पांच वर्षों में करीब ₹12,500 करोड़ तक का भुगतान करना पड़ सकता है। यदि राज्य की आर्थिक विकास दर अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही, तो यह राशि बढ़कर ₹19,000 करोड़ तक पहुंच सकती है।

दस्तावेज़ों के अनुसार, 2035-36 तक असम को केवल 2,829 मेगावाट अतिरिक्त कोयला आधारित बिजली की आवश्यकता होगी, जबकि सरकार ने 3,200 मेगावाट खरीदने का समझौता किया है। इससे जरूरत से अधिक बिजली खरीदने और उसके भुगतान को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के पत्र में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि समझौते में ‘अनुपयोगी बिजली’ के लिए भुगतान का प्रावधान शामिल है।

इस खुलासे के बाद समझौते की समय-सीमा, आवश्यकता और संभावित वित्तीय बोझ को लेकर राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

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