केंद्र सरकार ने देश के लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से दिए जा रहे सुदृढ़ीकृत चावल के वितरण को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इस निर्णय को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
यह मुद्दा तब प्रमुखता से सामने आया था जब खोजी पत्रकार मैं नितिन सेठी और उनके सहयोगी श्रीगिरीश जलीहल ने मई 2023 में अपनी संस्था द रिपोर्टर्स कलेक्टिव के माध्यम से सुदृढ़ीकृत चावल योजना पर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रकाशित किया था।
रिपोर्ट में क्या थे आरोप
खोजी प्रतिवेदन में दावा किया गया था कि—
- योजना को विशेषज्ञों की आपत्तियों के बावजूद आगे बढ़ाया गया।
- प्रारंभिक परीक्षण परियोजनाओं के परिणाम संतोषजनक नहीं थे।
- आंतरिक शासकीय दस्तावेजों में मतभेद दर्ज थे।
- कुछ निगमित समूहों और उनसे जुड़े गैर-सरकारी संगठनों को इस योजना से बड़ा आर्थिक लाभ होने की संभावना थी।
- कई राज्यों में लाभार्थियों ने चावल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें कीं और उसे कृत्रिम चावल तक कहा।
पत्रकारों का कहना है कि उनके प्रतिवेदन और दस्तावेज न्यायालयों में भी प्रस्तुत किए गए। यह श्रृंखला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रही और इसे प्रतिष्ठित फेतिसोव पत्रकारिता पुरस्कार के लिए अंतिम सूची में शामिल किया गया था।
सरकार का पक्ष
पत्रकार नितिन सेठी के अनुसार, सरकार ने अब योजना को अस्थायी रूप से रोकते हुए कहा है कि सुदृढ़ीकृत चावल से अपेक्षित पोषण लाभ नहीं मिल रहा था। हालांकि, निलंबन के पीछे विस्तृत कारणों पर अभी तक आधिकारिक रूप से स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
खोजी पत्रकारिता पर जोर
नितिन सेठी ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि लोकतंत्र में खोजी पत्रकारिता की क्या भूमिका है। उनके अनुसार, सशक्त और संसाधनयुक्त स्वतंत्र पत्रकारिता ही सत्ता को जवाबदेह बनाती है और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करती है।
फिलहाल, सुदृढ़ीकृत चावल योजना के भविष्य और सरकार के अगले कदमों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की प्रतीक्षा है।
![]()

