साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के कुसमुण्डा क्षेत्र में मजदूर आंदोलन को लेकर एटक संगठन के भीतर गंभीर मतभेद सामने आए हैं। संयुक्त कोयला मजदूर संघ (एटक) के क्षेत्रीय अध्यक्ष बी.एल. महंत (राजवीर) ने संगठन के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
दो माह पूर्व खदान में कार्यरत कामगारों की जटिल समस्याओं को लेकर एटक, एचएमएस एवं इंटक यूनियनों ने संयुक्त रूप से 5 सूत्रीय मांगों पर आंदोलन का ऐलान किया था। इस आंदोलन को क्षेत्रीय अध्यक्ष बी.एल. महंत (राजवीर) ने पूर्ण समर्थन दिया था।
हालांकि, एटक कुसमुण्डा के क्षेत्रीय सचिव अजीत कुमार सिंह ने एसईसीएल प्रबंधन को पत्र लिखकर आंदोलन के लिए दिए गए नोटिस तथा क्षेत्रीय अध्यक्ष के हस्ताक्षर को शून्य घोषित कर दिया और आंदोलन से किनारा कर लिया। इसके बावजूद बी.एल. महंत आंदोलन में शामिल हुए, जिसके बाद से संगठन में आंतरिक खींचतान शुरू हो गई।
बी.एल. महंत ने अपने त्यागपत्र में आरोप लगाया है कि पिछले एक वर्ष से क्षेत्रीय सचिव द्वारा मनमाना रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि—
संगठन में पदाधिकारियों और समिति सदस्यों का मनमर्जी फेरबदल किया गया।
यूनियन के बैंक खाते में क्षेत्रीय अध्यक्ष का नाम नहीं जोड़ा गया, जिसे उन्होंने संदेहजनक बताया।
मजदूरों के वाजिब हक की लड़ाई पर चुप्पी साध ली गई।
महंत ने यह भी उल्लेख किया कि इन सभी मामलों की मौखिक और लिखित शिकायत एसकेएमएस (एटक) के केंद्रीय महामंत्री अजय विश्वकर्मा को दी गई, लेकिन संगठन की बिगड़ी स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
लेबर कोड पर भी जताई चिंता
अपने इस्तीफे में महंत ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड का जिक्र करते हुए कहा कि मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष की आवश्यकता है, लेकिन संगठनात्मक कमजोरियों के कारण कुसमुण्डा क्षेत्र में मजदूरों की प्रभावी लड़ाई नहीं लड़ी जा पा रही है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अध्यक्ष होने के नाते मजदूरों के प्रति उनकी जवाबदेही है, परंतु वर्तमान परिस्थितियों में संगठन के भीतर रहकर वे मजदूर हित में कुछ भी प्रभावी नहीं कर पा रहे थे।
15 फरवरी को सौंपा त्यागपत्र
आहत होकर बी.एल. महंत (राजवीर) ने 15 फरवरी 2026 को एसकेएमएस (एटक) के समस्त पदों एवं प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
इससे पहले दीपिका क्षेत्र में भी एटक के मुख्य पदाधिकारी सहित कई सदस्यों ने संगठन से इस्तीफा दे दिया था। उभरा यह विवाद मजदूर राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। अब देखना होगा कि केंद्रीय नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है और संगठन में एकजुटता बहाल हो पाती है या नहीं।
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