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प्रद्युत बोरदोलोई जी ने लोकसभा में असम और पूर्वोत्तर में बढ़ते पर्यावरणीय विनाश और कथित भ्रष्टाचार का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में, खासकर असम में, पर्यावरण को खनन और वन माफिया के हाथों बेचा जा रहा है।

असम में जंगलों का नुकसान

उन्होंने कहा कि 2017 के बाद से असम में लगभग 1,300 वर्ग किलोमीटर जंगल खत्म हो चुके हैं। 2001 से 2023 के बीच देश के पांच राज्यों में कुल वृक्ष आच्छादन हानि का 60 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया, जिसमें असम सबसे आगे रहा। असम में 3.24 लाख हेक्टेयर वृक्ष आच्छादन का नुकसान हुआ, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 66,000 हेक्टेयर रहा।

देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य पर सवाल

देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह संरक्षित क्षेत्र होने के बावजूद अवैध खनन के लिए खुला छोड़ा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जैव-विविधता से समृद्ध इस क्षेत्र में नियमों की अनदेखी कर खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

रैट-होल कोयला खनन और मौत की घटनाएं

राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा रैट-होल कोयला खनन को अवैध घोषित किया जा चुका है और इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी सहमति जताई है। इसके बावजूद असम और मेघालय में रैट-होल खनन जारी रहने का आरोप लगाया गया।

6 जून 2025 को असम के उमरांगसो (जिला दीमा हसाओ) में नौ मजदूरों के जिंदा दफन होने की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ इलाके “मौत की घाटी” में बदलते जा रहे हैं। घटना के बाद 220 रैट-होल कोयला खदानें दीमा हसाओ में और 234 खदानें तिनसुकिया जिले में बंद की गई थीं, लेकिन बाद में फिर से अवैध गतिविधियां शुरू होने का आरोप लगाया गया।

सरकार से सवाल

उन्होंने सरकार से पूछा कि जब न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट रूप से रैट-होल कोयला खनन को अवैध ठहरा चुके हैं, तो असम और मेघालय की सरकारें इसे पनपने क्यों दे रही हैं? उन्होंने मांग की कि अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई हो, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और पूर्वोत्तर के पर्यावरणीय संतुलन को बचाने के लिए ठोस नीति लागू की जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो पूर्वोत्तर के कई हिस्से स्थायी पर्यावरणीय संकट की चपेट में आ जाएंगे।

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