लोकसभा के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “सुन लो ट्रंप — भारतीयों के डेटा से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।” यदि INDIA गठबंधन की सरकार होती, तो परामर्श में वे स्पष्ट रूप से कहते कि “तुम्हारे पास डॉलर है, हमारे पास डेटा।” — और वही हमारा सबसे बड़ा वाणिज्यिक और रणनीतिक लाभ होना चाहिए था, राहुल ने जोर देकर कहा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई डील में भारत की डाटा संप्रभुता, डेटा स्थानीयकरण (data localization) और डिजिटल टैक्स जैसे अहम मुद्दों पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं मांगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने डिजिटल ट्रेड में भारतीय हितों से समझौता किया है, जिससे विदेशी कंपनियों को लाभ होगा और भारत अपनी रणनीतिक ताकत खो सकता है।
उन्होंने भारत पर लगने वाले अमेरिकी टैरिफ़ में वृद्धि का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे भारत को कमजोर स्थिति में बातचीत करनी पड़ रही है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि भारतीय पक्ष ने डील के दौरान सख्त शर्तें नहीं रखीं, तो इसका सीधा निहितार्थ यह है कि भारतीय डेटा और संप्रभु संसाधनों को बाज़ार की ताकतों के सामने छोड़ दिया गया।
विपक्ष नेता के बयान के अनुसार, भारत की जनसंख्या और उससे उत्पन्न डेटा आज के वैश्विक AI-आधारित आर्थिक और सुरक्षा परिदृश्य का सबसे बड़ा संसाधन है, जिसे समझौते के दौरान भारत को मजबूती से लड़ना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अगर डील भारत की शर्तों पर होती, तो डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और भारत-बाह्य कंपनियों पर उचित टैक्सिंग जैसे मुद्दों को प्राथमिकता मिलती।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत “डिजिटल ट्रेड में बाधाएं हटाने” के नाम पर भारत के हितों से समझौता कर लिया है। राहुल गांधी के मुताबिक इस समझौते के बाद भारत के लिए अपने ही डेटा का इस्तेमाल देशहित में करना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि पहले से ही फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, अमेज़न और एंड्रॉयड जैसी बड़ी विदेशी कंपनियों का भारतीय डेटा पर लगभग एकाधिकार है। नए समझौते के बाद भारत को अपने नागरिकों का डेटा सुरक्षित रूप से देश में संग्रहित करने, विदेशी कंपनियों के सोर्स कोड और एल्गोरिदम में पारदर्शिता लाने तथा भारतीय डेटा से होने वाले मुनाफे पर कर लगाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
राहुल गांधी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पर दबाव डालकर भारत के सबसे अहम संसाधन — डेटा — को एक विदेशी शक्ति के हवाले किया जा रहा है, जो देश के डिजिटल भविष्य और आत्मनिर्भरता के लिए गंभीर खतरा है।
इस बीच, सरकार ने अभी तक इस आरोप पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि संसद में विपक्ष का हंगामा जारी रहा और सत्र में तेज बहस देखी गई।
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