दिल्ली पब्लिक स्कूल जमनीपाली, कोरबा के पूर्व प्राचार्य डॉ. बी. सिंह ने प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस मीट को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली पब्लिक स्कूल हमारे लिए केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि मूल्यों, संस्कारों और सतत उत्कृष्टता की एक सशक्त परंपरा है। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा व्यक्तित्व देना है जो जीवन में सत्य, अनुशासन और करुणा के मार्ग पर दृढ़ रहे।
उन्होंने कहा कि दिल्ली पब्लिक स्कूल में यह विश्वास दृढ़ है कि शिक्षा का वास्तविक अर्थ चरित्र निर्माण में निहित है। इसी कारण अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व को समान महत्व दिया जाता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि डीपीएस के शिक्षक केवल अध्यापक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक होते हैं, जो प्रत्येक छात्र की क्षमता को पहचानकर उसे आत्मविश्वासी, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करते हैं। यही मूल्य-आधारित शिक्षा, समग्र विकास की दृष्टि और भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता, दिल्ली पब्लिक स्कूल को अन्य विद्यालयों से विशिष्ट बनाती है। ये सभी गुण और मूल्य संस्थान के संस्थापकों—श्री धर्म वीरा, डॉ. प्रेम किरपाल, आर.एस. लुगानी, न्यायमूर्ति एस.एम. सीकरी सहित अन्य महान विभूतियों—द्वारा स्थापित किए गए, जिनकी दूरदृष्टि और आदर्शों पर दिल्ली पब्लिक स्कूल की नींव रखी गई।
उन्होंने बताया कि वे वर्ष 1987 से 1995 तक डीपीएस जमनीपाली, कोरबा में प्राचार्य के रूप में सेवाएँ दे चुके हैं। इस दौरान संस्थान यह भी सुनिश्चित करता रहा कि शिक्षकों को सम्मानजनक कार्य वातावरण के साथ उचित पारिश्रमिक एवं कार्य-संतुष्टि प्राप्त हो, जिससे वे निरंतर प्रेरित रहते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकें।
प्रेस मीट के दौरान डॉ. सिंह ने कोचिंग की बढ़ती परंपरा को शिक्षा व्यवस्था के लिए एक अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा विद्यालय में ही मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें अलग से कोचिंग लेने की आवश्यकता न पड़े।
बात को आगे बढ़ाते हुए डीपीएस जमनीपाली, कोरबा के वर्तमान प्राचार्य डॉ. सतीश शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के नाम पर व्यावसायिक दोहन तेजी से फल-फूल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में दिल्ली पब्लिक स्कूल से हजारों मेधावी विद्यार्थी बिना किसी कोचिंग के ही देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों—जैसे आईआईएम अहमदाबाद और आईआईटी—में प्रवेश पाते रहे हैं और आगे चलकर अत्यंत सफल करियर स्थापित किया है।
कोरबा में 23 वर्षों बाद पुनः आगमन पर डॉक्टर सिंह ने क्षेत्र में आए व्यापक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र के तीव्र आर्थिक विकास को देखकर वे आश्चर्यचकित और प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि कभी ईमानदार और सरल लोगों का छोटा सा कस्बा रहा कोरबा आज विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है।
इस अवसर पर विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी साहिल खेत्रपाल और मिलन भी उपस्थित रहे, जो स्टूडेंट्स एलुमनाई मीट के आयोजक हैं।
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